Monday, 30 January 2012

There is a need to Find the Option

आज हमारे देश और समाज की स्तिथी हमें नहीं लगता की किसी से अछुती होगी / देश के सहत्तर प्रतिशत आबादी आज के महंगे युग में २० रुपए रोजाना पर गुजरा करने को मजबूर है / हर जगह भ्रष्ट्राचार के ढोल और नगाड़े बज रहे है - भ्रष्ट्राचार हमरे भीतर है और हम सामने वाले में धुंदने में लगे हुए है / चिंता की बात यह नहीं है की यह देश कैसे चलेगा बल्कि चिंता इस बात की है कही ये देश ऐसे ही ना चलता रहे / अरे गरीब और मजदूर पर तो आत्याचार आम बात हो गई है , गुनाह की अंधी अब आमिरो को भी नहीं बक्श रही है / आब तो हद यह हो गई है जो इस समाज की तरीफ्दारी आज उनके भी बटियो की इज्जत नहीं बचती / इस देश में रोजाना 1000 बलात्कार होते है / विकास एक इलेक्शन जितने का शब्द मात्र बन चूका है /

अब सवाल उठा है भाई इसको बदलेगा कौन ? नेता कहते है मेरे बेटे और पोते को इलेक्शन में जीता दो तो हम विकास की गंगा बहा देंगे / अफसर कहते है हमारे हाथ में कुछ नहीं है , हम क्या कर सकते है, हमें ऊपर के आर्डर पे काम करना होता है ? पर अफसर बाबू झूठ क्यों बोलते है अभी मैंने देखा की आपके हाथ में घुस के रुपए है / डॉक्टर साहेब कहते है मुझे मरीज देखना है / इंजिनियर साहेब कहते मुझे सॉफ्टवेर बनाना है, बच्चो के लिए गेम बनाना , भारत को technolology में आगे ले जाना है / पत्रकार बोलते है हमारा कम है जनता तक सच पहुचना , और हद तो तब हो जाती जब सरकारी अश्पताल में 10 साल का बच्चा 100 रुपए की injection के पैसे न होने के कारन मरने वाला है, और ये न्यूज़ मीडिया वाले दिखा रहे '' देखये ब्रेअकिंग न्यूज़ इंसानियत नाम की कोई चीज़ नहीं यहाँ के लोगो में ये बच्चा मात्र 100 रुपए की सुई के आभाव में मरने वाला है'' / मै पूछना चाहता हू उन मीडिया वालो से क्या वे इन्सान नहीं रहे? विद्याअर्थी कहते है मै बड़ा होकर अफसर , डॉक्टर, इंजिनियर बनाना चाहता , पर आफसोस तब होता है जब बस बनाना चाहते है पर कुछ करना नहीं /

ये बात सही है है की डॉक्टर अगर इलाज छोड़ दे, इंजिनियर आपना कम छोड़ दे , और बाकि सभी आपना काम छोड़ दे फिर भी देश नहीं चलेगा , लेकिन यह भी सही है की अगर ऐसे ही आप अपना-अपना काम देखते रहे तो देश का कुछ नहीं होने वाला , क्यों की इस्की जिम्मादरी तो कोई लेगा नहीं, इस पोलटिकल फ़ील्ड में तो कोई प्रवेश ही नहीं करेगा/ हम में से कुछ को आगे आना ही होगा मेरा मतलब यह नहीं की इन गंवार और बेहुदे politician की तरह, मेरा मतलब है हमें education must necessary चाहिए / और साथ ही साथ जो जो टूल्स चाहिए उसे कोल्लेक्ट करना होगा और बाकि सभी लोगो को जाती , धर्म में ना बंद कर इन लोगो का सप्पोर्ट करना होगा./ बेहतर से बेहतर विकल्प धुंडने की जरुरत है / ham logo ko vikalp dundhne ki awshayakta hai. YAHI IS BLOG KA MAKSAD HAI.

जय हिंद

3 comments:

  1. kya bakwas kar raha hai be? khud me mast rah, duniya ko badlne ka theka le rakha hai kya be?

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    1. I think u have not potential to understand, kindly leave these issues to the intellectuals.

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